अंतरराष्ट्रीय

आखिरकार व्लादिमीर पुतिन के पास ऐसा कौन सा रामबाण है? जिसकी वजह से वह किसी के बाप से भी नहीं डरते

रूस और यूक्रेन इसमें संकट अब निर्णायक हालात पर पहुंच गया है रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को पूर्वी यूक्रेन के लुंगस्क और डोनेत्स्क जैसे इलाकों को एक अलग देश के रूप में अपनी मान्यता दे दी है। उनके इस फैसले के साथ ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, साथ ही में अमेरिका की तरफ से रूस के साथ-साथ लुंगस्क और डोनेत्स्क पर भी पाबंदी की बात कही गई है। रूस पर ब्रिटेन कनाडा और जापान ने भी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया है। साथ ही में आपको बताते चलें कि यूनाइटेड नेशन में भी बहुत ही कठोर लहजे में रूस की मजम्मत की है।

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इस समय यूक्रेन की सीमा पर रूस के 150000 जवान तैनात हैं और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि ऐसा फैसला लेना बहुत ही जरूरी था क्योंकि यूक्रेन की आर्मी नाटो के इशारे पर चलती है साथ ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि, हम डर नहीं रहे हैं बल्कि शांति और कूटनीति से रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन हम आपको बता दें कि हम किसी को कुछ भी नहीं देंगे।

खैर छोड़िए, इन सब मामलों को देखते हुए एक सवाल यह पैदा हो रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास ऐसी कौन सी चीज है, जिसकी वजह से वह किसी से नहीं डर रहे हैं उनके पास ऐसा कौन सा रामबाण है? या ऐसी कौन सी कूटनीति है? जिसके चलते आज वे पूरे यूरोप ही नहीं बल्कि अमेरिका से भी टक्कर देने के लिए तैयार हैं। आज हम आपको इन्हीं सवालों का जवाब देने की कोशिश करने जा रहे हैं।

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किसी भी इंसान के बानगी  उसके बचपन से बखूबी समझी जा सकती है आपको बताते चलें कि पुतिन की पैदाइश और उनकी परवरिश लेनिनग्राद में हुई है। पुतिन उस माहौल में परवरिश पाए हैं, जहां पर लड़कों से झगड़े और मारपीट होना मामूली बात है। यही वजह है कि पुतिन ने शुरुआती दौर में जूडो सीखा। बात अक्टूबर 2015 की है जब पुतिन ने कहा था कि लेनिनग्राद की स्ट्रीट फाइट से मैंने यह सबक लिया कि अगर लड़ाई तय हैं तो सबसे पहले खुद ही पंच मारो।

बचपन से ही व्लादिमीर पुतिन का झुकाव जासूसी में था पुतिन ने कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद रूस की सुरक्षा एजेंसी केजीबी में कार्यकर्त हुए। यह काम जासूसी का था जिसके बाद साल 1997 में बोरिस की सरकार में प्रधानमंत्री के रूप में शामिल हुए, बोरिस के इस्तीफे के बाद 1999 में राष्ट्रपति भी बन गए। साल 2002 में पुतिन ने अपना पहला राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा और जिसमें बखूबी जीत हासिल कर ली उसके बाद रूस की राजनीति में ऐसा होने लगा जैसा पुतिन चाहते थे। 2004 में पुतिन दोबारा राष्ट्रपति बने और उसके बाद 2012 में तीसरी बार और साल 2018 में  पुतिन चौथी बार रूस के राष्ट्रपति पद की शपथ ली व्लादिमीर पुतिन का यह कार्यकाल 2024 तक चलेगा। साथ में आपको बताते चलें कि रूस की सियासत में जोसेफ स्टालिन के बाद सबसे लंबे वक्त तक राष्ट्रपति बनने वाले रूसी नेता पुतिन ही हैं।

2000 से अब तक राष्ट्रपति पद संभालने वाले पुतिन की लोकप्रियता रूस में लगातार बढ़ती जा रही है. आपको बताते चलें कि पहले चुनाव में उन्हें मात्र 53 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि 2018 में यह आंकड़ा उछलकर 77 फीसद हो गया. हालांकि पश्चिमी देश यह भी कहते हैं कि  पुतिन चुनाव में धांधली करते हैं. यह आरोप सही है या गलत? यह हम तो नहीं जानते लेकिन इतना जरूर जानते हैं कि, व्लादिमीर पुतिन के कार्यकाल में अभी तक कोई बड़ा प्रदर्शन उनके खिलाफ नहीं देखा गया है. रूस की मीडिया  पुतिन को दयालु और कुत्तों से प्यार करने वाला व्यक्ति बताती है साथ ही में उनकी लोकप्रियता का असर ऐसा है कि रूस में बहुत सारे प्रोडक्ट उनके नाम से बिकते हैं। लेकिन ऐसा क्या है जिसे पुतिन को पुतिन बनाया है?

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अब हम आपको  पुतिन के दो हजार अट्ठारह का एक भाषण याद दिलाते हैं। 1 मार्च को मास्को में प्रेसिडेंट पुतिन ने 5 से भी ज्यादा अपने नए मिसाइल सिस्टम की तारीफ की कहा कि यह मिसाइल अमेरिका के डिफेंस को भी तोड़ सकते हैं उनका कहना है कि अब तक जितने भी मिसाइलें हैं वह सब किसी ना किसी फ्यूल इंजन से चलती है बल्कि उनमें खुद का न्यूक्लियर एनर्जी नहीं होता। जबकि पुतिन ने अपने भाषण में दावा किया है कि उनका नया मिसाइल सिस्टम में ऐसे न्यूक्लियर रिएक्टर लगाए गए हैं जो उसे न्यूक्लियर एनर्जी से चलाते हैं। ऐसी ही एक मिसाइल सिस्टम का नाम पुतिन ने बताया सम्रात38 जो 11000 किलोमीटर की दूरी आराम से तय कर सकता है और साथ ही में 200 टन का न्यूक्लियर बम भी कैरी कर सकता है. डिफेंस विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रूसी मिसाइल 40 मेगाटन तक एक्सप्लोसिव एनर्जी वाले न्यूक्लियर बम ले जा सकता है। जिसकी पावर हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए अमेरिकी बमों से तकरीबन 2000 गुना ज्यादा होगी। और रूस जनता का मानना है कि अमेरिका में ग्लोबल स्ट्राइक नाम का जो डिफेंस सिस्टम बन रहा है वह भी सम्राट 38 का कुछ भी उखाड़ नहीं सकता है।

आपको बताते चलें कि चुनावी भाषण के बीच पुतिन ने इसके साथ में ही अवांतगार्द और किंशाल नाम के बड़े हथियारों के बारे में भी चर्चा किया, जिसकी ताकत बहुत ज्यादा बताई हालांकि पश्चिमी देश इन हथियारों की अस्तित्व पर काफी सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि जिस तरीके से रूस की हालत है ऐसे में इतना खर्च उठाना रूस के बस की बात नहीं है और साथ ही में ऐसे हथियार बनाने के बाद कई बार इन हथियारों का परीक्षण करना भी पड़ता है और उनसे होने वाली रेडिएशन को छिपाया नहीं जा सकता।

जिस पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जवाब दिया कि रूस के दुश्मन इस बात को भूल जाएं कि यह बात कोई छूट है और हम सिर्फ झांसा दे रहे हैं बल्कि हमारी बातों को गंभीर तरीके से लिया जाए हम सबसे पहले हमला नहीं करेंगे लेकिन अगर हमले की स्थिति बनती है तो न्यूक्लियर हमलों से इसका जवाब भी देंगे।

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